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सुक्खू सरकार को घेरेंगी एक साथ 6 मज़दूर यूनियनें, 30 जनवरी से होगा आंदोलन शुरू….

सरकाघाट। मनरेगा व निर्माण मज़दूरों के लाभ राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड से गैर कानूनी तौर पर रोकने के ख़िलाफ़ 30 जनवरी को मंडी में सरकार के ख़िलाफ़ रैलियों का सिलसिला शुरू हो रहा है जो 9 फ़रवरी तक जारी रहेगा।मज़दूर संगठन सीटू, इंटक, बीएमएस, टीयूसीसी, एसकेएस और एटक छह ट्रेड यूनियनों ने मिलकर सरकार के खिलाफ एक मंच पर इकठ्ठे होकर संघर्ष छेड़ने का एलान किया है। संयुक्त संघर्ष समिति के राज्य सयोंजक व बोर्ड के सदस्य भूपेंद्र सिंह ने बताया कि गत माह घुमारवीं में बनी योजना के अनुसार ज़िला स्तर पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं और उसी की कड़ी में पहली विरोध रैली 30 जनवरी को मंडी में होने जा रही है।

उन्होंने बताया कि सुखू के नेतृत्व में राज्य सरकार द्धारा मनरेगा व निर्माण मज़दूरों को श्रमिक कल्याण बोर्ड से बाहर करने और उनकी सहायता रोकने का फ़ैसला 12 दिसंबर 2012 को लिया था जिसके ख़िलाफ़ सभी ट्रेड यूनियनों ने विरोध किया लेक़िन सरकार ने प्रदेश के साढ़े चार लाख मज़दूरों के करोड़ों रुपए की सहायता रोक दी है और उसके साथ साथ बोर्ड में पंजीकरण और नवीनीकरण भी रोक दिया है जिसके खिलाफजनवरी माह में गांव गांव में जनअभियान किया और अब ज़िला स्तर पर विरोध रैलियां आयोजित की जाएगी। जिसकी शुरुआत 30 जनवरी को मंडी और कुल्लू  से होगी 1 फ़रवरी को  शिमला, रोहड़ू औऱ रामपुर, 5 फ़रवरी को हमीरपुर, 7 फ़रवरी को धर्मशाला,8 को ऊना और 9 को बिलासपुर में विरोध रैली होगी।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के लिए ये फ़ैसला आत्मघाती होगा और दो महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनावों में उन्हें इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे। क्यूंकि मज़दूरों ने बड़ी उम्मीद से प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनाई थी लेकिन उसने पहले से मिल रही सहयता भी रोक दी है जबकि इसके लिए सरकार को कोई बजट भी नहीं देना होता है और बोर्ड में सभी निर्माण कम्पनियों व ठेकेदारों द्धारा सेस देना होता है जो 1996 के क़ानून के अनुसार अदा करना अनिवार्य है।

भूपेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार मनरेगा मज़दूरों को घोषित 240 रु दिहाड़ी के बजाये अभी तक 198 रु ही अदा कर रही है जिसका कारण राज्य सरकार द्धारा अपना दस प्रतिशत हिस्सा जारी न करना है। इसलिए यूनियन घोषित 240 रु दिहाड़ी जल्दी जारी करने की भी मांग उठा रही है। इसके अलावा मनरेगा मज़दूरों को प्रदेश सरकार की अन्य दिहड़ीदारों के लिए निर्धारित 375 रु मज़दूरी देने की भी मांग भी सरकार से की जाएगी जो कि कांग्रेस पार्टी ने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था। यही नहीं वर्तमान में सौ दिनों के बजाये मज़दूरों को 40-50 दिनों का ही काम मिल रहा है और सरकार काम देने में भी नाकाम साबित हो रही है।

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