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गैहरा पँचायत के वर्षा प्रभावितों को नहीं मिल रही है मदद

सरकाघाट। सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र की गैहरा व भरनाल ग्राम पंचायतों के वर्षा प्रभावितों की बैठक गैहरा में आयोजित की गई जिसमें दत्त राम, हेत राम, पूनु राम, हेमादेवी, मलका देवी, शिवि देवी, प्रकाश चन्द, लीला देवी, अमींचन्द, जयपाल, हरिमन्, मस्त राम, हेमंत, अनिल कुमार, देश राज इत्यादि ने भाग लिया। जिसमें राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड सदस्य और पूर्व ज़िला पार्षद भूपेंद्र सिंह और हिमाचल किसान सभा के खंड अध्यक्ष दिनेश काकू ने प्रभावितों की समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की और प्रशासन द्धारा इन परिवारों को अभी तक भी राहत न पहुंचाने पर चिंता व्यक्त की।भूपेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने बेघर हुए परिवारों को 31 मार्च तक निशुल्क राशन देने, किराये पर रह रहे मकानों का किराया देने, रसोई गैस सिलेंडर देने तथा बच्चों की पढ़ाई के लिए सहायता प्रदान करने,मकान बनाने के लिए धनराशि और भूमि देने की घोषणा की है लेकिन यहाँ पर ये कोई भी घोषणा अभी तक लागू नहीं कि गयी है।

प्रभावितों ने उन्हें बताया कि अगस्त माह में उन्हें दो बार 5-5 किलो चावल, आटा व अन्य खड्य सामग्री ही मिली थी जो 15-20 दिनों में ही ख़त्म हो गई थी लेकिन उसके बाद अब कोई भी इसके बारे में बात नहीं कर रहा है।यही स्थिति किराये पर लिए मकानों की है जिन्हें घोषणा के अनुसार अभी तक किसी भी परिवार को ये नहीं मिला है और अब तो मकान मालिक उन्हें घर ख़ाली करने के लिए कह रहे हैं।यही नहीं कुछ परिवार जो खुद तो किराये पर रह रहे हैं लेकिन मवेशी उन्हें बेचने पड़े हैं और बेघर हुए अमीं चन्द को तो अपनी दो गायें, बछड़ी और मुर्ग़े फ़्री में ही देने पड़े हैं जिन्हें रखने के लिए उसने पांच सौ रुपये पर गौशाला किराये पर ली थी।

इसके अलावा सबसे ज्यादा लापरवाही स्थानीय पटवारी सामने आई है जिसने एक दर्जन परिवारों को डैमेज रिपोर्ट में शामिल ही नहीं किया है और जब इसकी शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंच गई है और उसके बाद एसडीएम और कांग्रेस नेता पवन ठाकुर ने भी यहाँ का दौरा किया है।लेक़िन उसके बाद भी पटवारी प्रभावितों को ऐसी धमकी दे रहा है कि आप जहां मर्जी जाओ रिपोर्ट तो मैं ही बनाऊंगा।इसलिये इस पटवारी को यहां से तुरन्त हटाने और सर्वेक्षण रिपोर्ट में बर्ती गयी कोताही के लिए उसके ख़िलाफ़ तुरन्त कार्यवाई करने की उन्होंने मांग की है।प्रभावितों ने बताया कि बहुत से घरों में तो वे दूर से देखकर ही चले जाते हैं और उसी के आधार पर अधूरी रिपोर्ट बना कर भेज देते हैं।

हालांकि, 27 नवंबर को एसडीएम और अन्य कर्मचारी भी यहां आए थे लेकिन वे भी किसी प्रभावित से नहीं मिले और सड़क से ही घूमकर वापिस लौट गए और मीडिया में झूठी कहानी छपवा दी थी।कुछ परिवारों को तो ये कहा जा रहा है कि उनके मकान सरकारी भूमि में हैं जबकि ये मकान 60-70 पहले बुज़ुर्गों ने बनाये हैं जिन्हें बिजली, पानी के कनेक्शन दिए गए हैं और किसी को ये बोल रहे हैं कि आपका घर जुड़ा हुआ है इसलिए एक ही परिवार को सहायता राशी मिलेगी और किसी को ये भी बोला जा रहा है कि उन्हें पहले मकान बनाने को सहायता मिल चुकी है इसलिए दोबारा नहीं मिलेगी। कुल मिलाकर सरकार ने जो भी सहायता प्रदान करने की घोषणा की है वह कुछ भी यहां के प्रभावितों को नहीं मिल रही है। कुछ लोग राजनीतिक आधार पर इनके साथ भेदभाव कर रहे हैं और चुने हुए विधायक तो इनके पास अभी तक गये भी नहीं जबकि ये अधिकांश परिवार गरीब और अनुसूचित जातियों के हैं जिन्हें सहायता की सख़्त जरूरत है लेकिन पिछले चार महीनों से इनके साथ प्रशासन का व्यवहार बहुत ही गैर जिम्मेदाराना है। इसलिए बैठक में निर्णय लिया गया है यदि अगले एक सप्ताह में उनकी मांगों पर अमल नहीं किया गया तो सभी प्रभावित हिमाचल किसान सभा के बैनर तले सरकाघाट में 11 दिसंबर को एसडीएम कार्यालय पर धरना देंगे।

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